उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि देश के समाज सुधारकों की महान विरासत का सम्मान करना और उसे बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। श्री राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के द्वारका में मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथ पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण करने और ‘मन्नम स्मृति मंडपम’ का उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा और सामुदायिक सेवा के प्रति मन्नाथ पद्मनाभन की जीवन भर की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मन्नाथ पद्मनाभन के आदर्श एक समावेशी और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में देश को प्रेरित करते रहते हैं।
मन्नाथ पद्मनाभन को आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों में से एक बताते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि उनका जीवन शिक्षा, समाज सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा कि जब समाज सुधार की अवधारणा को शायद ही समझा जाता था और कई लोग बिना किसी सहारे के कष्ट झेल रहे थे, उन्ही दिनों मन्नाथ पद्मनाभन समाज की सेवा के लिए आगे आए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के साथ मन्नाथ पद्मनाभन का जुड़ाव इन आदर्शों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और अधिक दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के साथ-साथ, मन्नाथ पद्मनाभन ने सामाजिक रूप से वंचित लोगों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री राधाकृष्णन ने ऐतिहासिक ‘वायकोम सत्याग्रह’ में उनकी सक्रिय भागीदारी पर भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारत के समाज सुधार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक बताया।
इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक पौधा भी लगाया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी, नायर सर्विस सोसायटी-एनएसएस दिल्ली के अध्यक्ष एम. के. जी. पिल्लई, एनएसएस दिल्ली के महासचिव एम. डी. जयप्रकाश और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।