सितम्बर 23, 2026 1:52 अपराह्न

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फिच रेटिंग्स ने भारत की जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान 6.4% से बढ़ाकर 6.9% किया

फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अपना पूर्वानुमान 6.4% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। जून माह में जारी अपने वैश्विक आर्थिक आउटलुक में एजेंसी ने इस वृद्धि का कारण पहली तिमाही की मजबूत वृद्धि और भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता को बताया है। हालांकि, फिच को उम्मीद है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक गति धीमी हो जाएगी।

फिच का यह भी अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में घरेलू मांग में मजबूती, बढ़ती कीमतों और आपूर्ति पक्ष की प्रतिकूल परिस्थितियों का हवाला देते हुए ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है। उपभोक्ता खर्च में वृद्धि वित्त वर्ष 2027 में धीमी होकर 5.7% रहने की उम्मीद है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.2% थी। फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर और घटकर 6.5% रह जाएगी, जबकि दिसंबर 2026 तक मुद्रास्फीति बढ़कर 5.5% हो सकती है।

इस बीच, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ग्लोबल रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि का अपना अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक गतिविधि पर अपनी रिपोर्ट में एसएंडपी ने मजबूत औद्योगिक गतिविधि, स्वस्थ उपभोक्ता मांग, मजबूत वस्तु निर्यात और बढ़ते सरकारी निवेश को विकास का प्रमुख चालक बताया है। उसका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में उपभोक्ता मुद्रास्फीति औसतन 5.1% रहेगी। हालांकि, एसएंडपी ने चेतावनी दी है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास कमजोर हो सकता है क्योंकि वस्तु और सेवा कर – जीएसटी के युक्तिकरण और आयकर कटौती के लाभ धीरे-धीरे कम होते जाएंगे। एजेंसी ने मौसम संबंधी जोखिमों पर भी उल्लेख किया है। यह देखते हुए कि उसके आकलन के समय संचयी वर्षा सामान्य से 15% कम थी। इसलिए कृषि उत्पादन और खाद्य मुद्रास्फीति निगरानी के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।