भारत ने कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के लिए सैन्य समाधान नहीं बल्कि कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए। अमरीका के अटलांटा में कल जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले पूर्ण सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यह बात कही। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लेख करते हुए, समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने और नागरिक जहाजों तथा नाविकों पर होने वाले हमलों को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच उनका यह बयान आया है।
जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिन की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। अमरीका के अटलांटा में वैश्विक सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद सामने आए। बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान के खिलाफ अमरीका और इस्राइल का संघर्ष, अमरीकी शुल्क और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर असहमति रही। इन विवादों का असर वैश्विक ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार को लेकर अनिश्चितता के रूप में भी देखा जा रहा है।
बैठक का शुरुआती सत्र सौहार्दपूर्ण रहा, लेकिन रूस, यूक्रेन के मुद्दे पर अपने रुख पर कायम रहा और उसने पोलैंड को जी-20 में शामिल किए जाने का विरोध किया। दक्षिण अफ्रीका को बैठक में आमंत्रित नहीं करने के अमरीकी प्रशासन के फैसले पर भी मतभेद सामने आए। दक्षिण अफ्रीका जी-20 का सदस्य है। इन मतभेदों के कारण समूह की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जाएगा।
अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो चर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए अध्यक्षीय बयान जारी करेंगे। हालांकि, राजनयिकों ने बताया कि सभी देश अपने मतभेद दूर करने और अगले महीने अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मेजबानी में फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए हैं।