अक्टूबर 20, 2026 2:15 अपराह्न

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) को अपने नेताओं की राजनीतिक सोच को व्यावहारिक सहयोग में बदलना होगा। यह सोच इस क्षेत्र के लोगों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए। श्री सिंह ने ताजिकिस्तान में आज आयोजित एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित किया। श्री सिंह ने कहा कि संगठन के 25 वर्षों के सफर ने इसकी उपलब्धियों की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया है। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन स्तंभ हैं।

श्री सिंह ने कहा कि आतंकवाद इस क्षेत्र की शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद निर्दोष लोगों की जान लेता है। इससे, निवेश और आर्थिक क्षमताएं भी प्रभावित होती हैं। श्री सिंह ने बल देकर कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता है। न ही इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड होना चाहिए। आतंकवादियों का वित्तपोषण करने, समर्थन देने या पनाह देने वालों के लिए भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

श्री सिंह ने कहा कि भारत उन पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को सुगम बनाती हैं और विकास के नए अवसर पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और चाबहार बंदरगाह मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि कनेक्टिविटी परियोजनाएं परामर्श और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए।

श्री सिंह ने विकास के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का उपयोग करने में भारत के अनुभव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने वित्तीय समावेशन का विस्तार किया है। वहीं, देश ने दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक का निर्माण किया है।

श्री सिंह ने यह भी कहा कि भारत इस वर्ष के अंत में पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच की मेजबानी करेगा और सभी एससीओ सदस्य देशों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।