महाराष्ट्र के चिचपल्ली स्थित बांस अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र – बी.आर.टी.सी को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद – ए.आई.सी.टी.ई से 2026-27 शैक्षणिक वर्ष से बांस प्रौद्योगिकी में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। बी.आर.टी.सी भारत का पहला संस्थान बन गया है, जिसे बांस प्रौद्योगिकी में स्वतंत्र डिप्लोमा कार्यक्रम के लिए मान्यता प्राप्त हुई है। मुंबई स्थित महाराष्ट्र राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध इस पाठ्यक्रम में 60 विद्यार्थियों के प्रवेश की अनुमति दी गई है।
बी.आर.टी.सी 2017 से राज्य-मान्यता प्राप्त बांस प्रौद्योगिकी डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रदान कर रहा है। पाठ्यक्रम में बांस प्रसंस्करण और उपचार प्रौद्योगिकियां, फर्नीचर निर्माण, बांस निर्माण तकनीक, हस्तशिल्प, नर्सरी प्रबंधन, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण शामिल होंगे।
इस मान्यता से महाराष्ट्र के बांस उद्योग को मजबूती और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा स्थायी रोजगार सृजित होने के साथ ही ग्रामीण औद्योगिक विकास को भी सहयोग मिलेगा।