अगस्त 7, 2026 8:32 पूर्वाह्न

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यूपीआई लेनदेन पर बैंकों को शुल्क लगाने की अनुमति देने के लिए सरकार को अधिकृत करने वाला विधेयक लोकसभा से पारित

लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करने वाला विधेयक पारित कर दिया है। इसके अंतर्गत सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान साधनों के माध्यम से किए गए भुगतानों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी गई है। सरकार का उद्देश्य उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान सेवाओं पर मामूली शुल्क लगाना है, साथ ही बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं (पीएसपी) और डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने वाली भुगतान अवसंरचना फर्मों के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल सुनिश्चित करना है। सदन द्वारा पारित संशोधन में उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाने का प्रयास किया गया है जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर व्यापारी छूट दर (एमडीआर) वसूलने से रोकता है। वहीं, रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) के माध्यम से किए गए रियल टाइम भुगतानों पर पहले से ही सेवा शुल्क लगता है। यूपीआई लेनदेन अब तक ऐसे शुल्कों से मुक्त रहे हैं।

भुगतान तथा निपटान प्रणाली अधिनियम में प्रस्तावित परिवर्तन कराधान पर व्यापक कानून का हिस्सा है, जिसे मंगलवार को सदन में पेश किया गया था। सदन की कार्यवाही के पहले स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे फिर शुरू होने पर लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित किया गया। सदन के फिर एकत्रित होते ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को विचार के लिए प्रस्तुत किया, जिसमें भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 और आयकर अधिनियम, 2025 में आगे संशोधन करने और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करने का प्रावधान है।

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