पाकिस्तान में पिछले एक दशक में दर्ज ईशनिंदा मामलों का रिकॉर्ड आपराधिक कानून के अंतर्गत धार्मिक आरोपों से मानवीय जीवन पर खतरे को उजागर करता है। इस वर्ष इस तरह के मामलों की संख्या और बढ़ गई है। यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ऐसे आरोप फुसफुसाहट से शुरू होकर कारावास, मृत्युदंड या परिवारों के घरों के बाहर भीड़ के जमावड़े में बदल सकते हैं। पूरे पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अहमदी समुदायों के लिए खतरा कानून के बाहर काम करने वाले चरमपंथियों से कहीं अधिक व्यापक है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ईशनिंदा प्रावधानों का बार-बार व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद और अन्य प्रकार की सामाजिक शत्रुता को निपटाने के लिए दुरुपयोग किया गया है। ईसाई, हिंदू और अहमदी समुदायों से जुड़े मामले दर्शाते हैं कि कैसे धार्मिक आरोप गिरफ्तारी, कारावास, मृत्युदंड या भीड़ हिंसा में परिवर्तित हो सकते हैं।
News On AIR | अक्टूबर 10, 2026 10:07 अपराह्न
पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामलों में बढ़ोतरी, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता