अक्टूबर 23, 2026 9:09 अपराह्न

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भारत और श्रीलंका ने साझा बौद्ध विरासत के संरक्षण के जरिए अपने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया

भारत और श्रीलंका ने साझा बौद्ध विरासत के संरक्षण के जरिए अपने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया है। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के गंगारामया मंदिर में ‘सहिंता परियोजना’ की शुरुआत की गई है। इसके तहत प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा, ताकि उनमें दर्ज ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ज्ञान को संरक्षित रखा जा सके। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर द्वारा भारत सरकार की अनुदान सहायता से चलाई जा रही है। गंगारामया मंदिर इस पहल से जुड़ने वाला श्रीलंका का पहला संस्थान है।
इस वर्ष जुलाई में हुए समझौता ज्ञापन के तहत मंदिर में संरक्षित 100 प्राचीन पांडुलिपियों को स्थानीय विशेषज्ञों की टीम डिजिटल रूप दे रही है। भारत इस पहल में सहयोग कर रहा है और यह काम नवंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इन पांडुलिपियों में धार्मिक परंपराओं, दर्शन, भाषाओं और सांस्कृतिक प्रथाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण ज्ञान मौजूद है।
यह पहल भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे बौद्ध और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है। सहिंता परियोजना का उद्देश्य इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना और दक्षिण एशिया की साझा विरासत को संरक्षित करना है। साथ ही, इसके जरिए श्रीलंका के अन्य संस्थानों को भी इस पहल से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।