पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में घुसपैठ और इसके कारण जनसांख्यिकी बदलाव की आशंका व्यक्त की है। आज नाबन्ना राज्य सचिवालय में मुख्य जन गणना अधिकारियों के सम्मेलन का उदघाटन करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली सरकार घुसपैठ के मुद्दे पर कोई कार्रवाई करने में नाकाम रही। यही कारण था कि तृणमूल प्रशासन ने, केंद्र से समय से निर्देश मिलने के बावजूद, जनगणना कार्य की शुरूआत नहीं की।
मुख्यमंत्री ने सीमा पर बाड लगाने की अपर्याप्त व्यवस्था को जनसांख्यिकी बदलाव का कारण बताया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ का अधिक असर हुआ है। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकडों का उपयोग नीति निर्माण और कल्याणकारी योजना बनाने में किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा राज्य सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को जमीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल में जनगणना कार्य निदेशक डॉ. रोशनी कमाल ने मीडिया को बताया कि पहली बार जनगणना कार्य डिजिटली कराया जाएगा। नागरिक भी स्वगणना के जरिए इस कार्य में भागीदारी कर सकेंगे। पश्चिम बंगाल में इस वर्ष एक अगस्त से 15 अगस्त तक स्वगणना कार्य होगा। इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितम्बर तक मकानों की सूची बनाने का पहला चरण होगा। इस दौरान जनगणना कर्मी 33 अधिसूचित प्रश्नों के जरिए आवश्यक जानकारी हासिल करेंगे।
जनगणना कार्य के लिए चौबीसों घंटे कार्यरत हेल्प लाइन नम्बर शुरू किया गया है। पश्चिम बंगाल से संबंधित जानकारी के लिए 033-2335-9503 पर जनगणना निदेशालय से सम्पर्क किया जा सकता है।