उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में ‘वी.आई.पी. कल्चर इन इंडिया: पावर, प्रिविलेज एंड डिस्टेंस फ्रॉम डेमोक्रेसी’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक सत्ता संस्थानों और आम नागरिकों के बीच मौजूद दूरी पर विचार करती है और जन-केंद्रित शासन के माध्यम से इस दूरी को कम करने की आवश्यकता पर बल देती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की पहचान का उल्लेख करती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय एक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने नीट परीक्षा देने वाले छात्रों को यातायात असुविधा से बचाने के लिए हवाई अड्डे से अपनी उड़ान लगभग 45 मिनट तक विलंबित की थी।
उपराष्ट्रपति ने पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की सादगी और लोक सेवा की भावना के उल्लेख की सराहना की। उन्होंने कहा कि लेखकों ने उपनिषदों, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और पंचतंत्र सहित भारत की सभ्यतागत तथा बौद्धिक परंपराओं के संदर्भों के माध्यम से अपने विश्लेषण को समृद्ध किया है।