मई 27, 2026 7:33 पूर्वाह्न

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1983 में बिहार में पांच लोगों की हत्या के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा

उच्‍चतम न्‍यायालय ने 1983 में बिहार में पांच लोगों की हत्या के मामले में कई दोषियों की सजा  बरकरार रखते हुए कहा है कि इस घटना की क्रूरता न्यायिक अंतरात्मा को झकझोर देती है। न्‍यायमूर्ति संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कल कहा कि निचली अदालत और पटना उच्च न्यायालय दोनों ने सही कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह की सहानुभूति या नरमी की गुंजाइश नहीं है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने पटना उच्च न्यायालय के अगस्त 2017 के फैसले को चुनौती देने वाली दोषियों की अपीलों पर अपना यह फैसला सुनाया।

पटना उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा इन दोषियों को दी गई सजा और आजीवन कारावास को बरकरार रखा था।

उच्‍चतम न्यायालय ने कहा कि यह घटना मार्च 1983 में मुजफ्फरपुर जिले के एक गांव में हुई थी, जहां कम से कम 58 लोगों की भीड़ ने चंद्र शेखर चौधरी के घर में आग लगा दी थी, जिसके बाद पांच लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और कई लोग घायल हो गए। होली के दिन घातक हथियारों से लैस भीड़ ने चौधरी के घर को घेर लिया था।