सितम्बर 12, 2026 9:48 अपराह्न

printer

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया

नई दिल्ली के भारत मंडपम् में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सत्र के अंत में इस घोषणापत्र को अपनाने का प्रस्ताव रखा था। समापन भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र सदस्य देशों के साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि अब इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदलना ब्रिक्स की साझा जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की चर्चा से स्पष्ट है कि बदलते हुए विश्व का संचालन पुराने संस्थानों से नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण की प्रक्रिया में सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि भविष्य की प्रौद्योगिकी और उनके नियमों के निर्माण में ग्‍लोबल साउथ के देशों की समान भागीदारी होनी चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि निर्णयों और उनके परिणामों के बीच के अंतर को साझेदारी और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से पाटना होगा। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में सदस्य देशों के बहुमूल्य योगदान, रचनात्मक भावना और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया।

ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, सदस्य देशों के नेताओं ने दो स्मारक डाक टिकट भी जारी किए।

इससे पहले, उद्घाटन भाषण में, श्री मोदी ने ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बतलती रहती है, लेकिन इसकी संस्थागत गति बनी रहनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यान्वयन तंत्र तीन पक्षों के समूह ट्रोइका के माध्यम से सभी पहलों और उनके परिणामों की निगरानी करेगा।

श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत हमें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार से करनी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नाविक वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी कठिन समय में उन्हें समय पर सहायता नहीं मिल पाती है। इसके लिए उन्होंने समुद्री अधिकारियों और संबंधित देशों के राजनयिक मिशनों को जोड़ने के लिए आपात स्थिति में नाविक सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच की एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सदस्य देश एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स किसी देश के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स इस वर्ष अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। श्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपने विकास के शिखर पर है और पिछले दो दशकों में वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता जन-केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने के दृष्टिकोण पर आधारित है तथा लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण, भारत की प्रमुख प्राथमिकताएं रही हैं। उन्होंने इन प्राथमिकताओं के अंतर्गत ब्रिक्स सहयोग को सीधे आम लोगों से जोड़ने पर विशेष बल दिया। श्री मोदी ने बताया कि इसी दृष्टिकोण के साथ करीब 30 शहरों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकटों में ग्‍लोबल साउथ के देश सबसे आगे हैं, लेकिन निर्णय लेने में सबसे पीछे हैं। उन्होंने इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने पर जोर दिया। इस संदर्भ में श्री मोदी ने वैश्विक शासन में सुधार के लिए दस सूत्री कार्ययोजना का प्रस्ताव रखा, जिनका उद्देश्य अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ब्रिक्स सुधार की रूपरेखा तैयार करना है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब इसे और नहीं टाला जा सकता। उन्होंने वित्तीय संस्थानों की मतदान शक्ति, नेतृत्व पद और नीतिगत प्राथमिकताओं में ऐसे सुधार पर भी बल दिया, जो आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप हों। प्रधानमंत्री ने बताया कि वैश्विक आर्थिक विकास को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के लिए भारत मंडपम् में आगमन पर ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं का स्वागत किया