केंद्र सरकार ने गुजरात और राजस्थान में चल रहे चांदीपुरा वायरस रोग के प्रकोप से निपटने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप कार्य दल तैनात किया है। यह तैनाती देश भर के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों द्वारा निरंतर और गहन वैज्ञानिक जांच के साथ-साथ एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के तहत की गई है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि बहुविषयक राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप कार्य दल में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और पशुपालन तथा दुधारू विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि यह दल प्रकोप की जांच, महामारी संबंधी आकलन, नैदानिक प्रबंधन, प्रयोगशाला समन्वय, वेक्टर निगरानी और जन स्वास्थ्य उपायों के कार्यान्वयन में दोनों राज्य सरकारों के प्रयासों का सहयोग करेगा। दल जमीनी स्तर पर की जा रही कार्यों की समीक्षा करने और अपने क्षेत्र के मूल्यांकन के साथ मंत्रालय को सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभागों के साथ मिलकर काम करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य वायरस के संचरण चक्र को समझना है। चांदीपुरा वायरस के वाहक के रूप में सैंडफ्लाई को प्रमुख माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या मच्छर, टिक और माइट जैसे अन्य आर्थ्रोपोड भी इसके संचरण में भूमिका निभा सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2024 में गुजरात में चांदीपुरा वायरस का प्रकोप हुआ था। चांदीपुरा वायरस रैब्डोविरिडी परिवार का सदस्य है और देश के पश्चिमी, मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों में, विशेषकर मानसून के दौरान इसके मामले सामने आते रहे हैं। यह वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई मक्खी और टिक के माध्यम से फैलता है। यह बीमारी अधिकतर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। इसमें तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।