खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों के चयन में अधिक पारदर्शिता, खिलाड़ी-केंद्रित शासन और देश के खेल तंत्र में संस्थागत सुधारों का आह्वान किया है। आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि सभी हितधारकों के लिए खिलाड़ियों के हित और कल्याण सर्वोपरि होने चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी खिलाड़ी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
डोपिंग के मुद्दे पर डॉ. मांडविया ने भारतीय खेलों से इस खतरे को खत्म करने के लिए एक व्यापक रणनीति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए और निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, सुविधादाताओं और उपयोगकर्ताओं सहित पूरी श्रृंखला से एक पारदर्शी और मजबूत तंत्र के माध्यम से निपटा जाना चाहिए।
खेल मंत्री ने भारत के स्वदेशी कोचिंग तंत्र को मजबूत करने और विदेशी प्रशिक्षकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुपालन, सुशासन प्रथाओं और एशियाई खेल 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 और राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा की गई।