नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में नियमन, बाजार आधारित सुधार और संस्थागत क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र मौजूदा समय में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति में बाधा और बढ़ते ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों वाले जटिल वैश्विक माहौल में काम कर रहा है।
श्री गौबा ने कहा कि वर्ष 2006 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड-पीएनजीआरबी की स्थापना निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। उन्होंने प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के लिए नियामक ढांचा तैयार करने में पीएनजीआरबी के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कॉमन कैरियर और कॉन्ट्रैक्ट कैरियर व्यवस्था से पाइपलाइन ढांचे तक सभी को समान पहुंच मिली है और डाउनस्ट्रीम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
श्री गौबा ने कहा कि इस तरह का नियामक कार्य भले ही अक्सर दिखाई नहीं देता, लेकिन स्थिर और भरोसेमंद बाजार बनाने, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए यह बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए घरेलू ऊर्जा क्षमता का विस्तार और विविधीकरण दीर्घकालीन रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत के बदलाव को तेज करने पर भी बल दिया।