प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आज पुष्टि की कि भारत और चीन को अपने संबंधों के लिए रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष अगस्त में तियानचिन बैठक के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर प्रगति का स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को परस्पर सम्मान, संवेदनशीलता और हित के पारस्परिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए आवश्यक आधार है। उन्होंने सीमा संबंधी मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और समझ का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने बातचीत के माध्यम से सीमा मुद्दों के निष्पक्ष समाधान के प्रति वचनबद्धता व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की। सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और आवागमन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उन्होंने व्यापार असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी मुद्दों सहित एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने और बाजार पहुंच को सुगम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन के दौरान इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम के प्रधानमंत्रियों तथा अबू धाबी के युवराज के साथ द्विपक्षीय बैठकें की। श्री मोदी ने सबसे पहले इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. आबी अहमद अली के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से चर्चा की। उन्होंने आर्थिक सहयोग, रक्षा तथा सुरक्षा साझेदारी और क्षमता विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की। यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर 2025 में अदीस अबाबा की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित थी। दोनों नेताओं ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इथियोपिया की भागीदारी की सराहना करते हुए कि उसकी उपस्थिति ने वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज को बुलंद करने में मदद की है।
इसके बाद, श्री मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा तथा दोनों देशों के लोगों के संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने इस वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा के परिणामों का भी जायजा लिया। श्री मोदी ने आसियान-भारत संबंधों को मजबूत करने में मलेशिया के निरंतर समर्थन की सराहना की। उन्होंने पारस्परिक हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।
वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक में, श्री मोदी ने भागीदार देश के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वियतनाम का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा की। इस वर्ष मई में वियतनाम के राष्ट्रपति तो -लम् की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया था। दोनों नेताओं ने पारस्परिक महत्व के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया और अपनी साझेदारी को प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
भारत और वियतनाम के बीच सभ्यतागत विरासत, आपसी विश्वास और समझ पर आधारित अटूट और गहरी मित्रता है। वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति का प्रमुख स्तंभ है और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव में महत्वपूर्ण भागीदार है।
प्रधानमंत्री ने अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ भी वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-यू.ए.ई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दोहराया। यह मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक, ऊर्जा और जन-संबंधों पर आधारित है। दोनों देश साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने यूएई की अंतरराष्ट्रीय होल्डिंग कंपनी द्वारा ओडिशा में साढ़े ग्यारह अरब डॉलर की एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम परियोजना के विकास में निवेश करने की घोषणा का स्वागत किया। इस परियोजना से ओडिशा के वैश्विक एल्युमीनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।