पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर – पीओजेके में क्रूर सरकारी कार्रवाई में मरने वालों की संख्या पिछले दो दिनों में बढ़कर 30 हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय संगठन, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी – जेएएसी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें सोमवार को 25 और मंगलवार को पांच और लोग मारे गए। पीओजेके पिछले कई महीनों से पाकिस्तानी अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की लहर से घिरा हुआ है। जेएएसी ने पाकिस्तान की सेना और अधिकारियों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बाधित करने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करने और इंटरनेट बंद करके क्षेत्र को बाकी दुनिया से अलग करक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया है। रावलकोट में हुई घातक हिंसा के बाद पीओजेके में अशांति मीरपुर तक फैल गई है, जहां कई सोशल मीडिया खातों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नए प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों पर गोलियां चलाईं।
इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी सेना द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर -पीओजेके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के प्रयोग की खबरों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। साथ ही, उसने पाकिस्तानी अधिकारियों से संचार सेवाएं बहाल करने और मीडिया तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में जाने की अनुमति देने का आग्रह किया है। एक बयान में, एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया क्षेत्र की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक, इसाबेल लैसी ने क्षेत्रीय चुनाव के पहले दिन रावलकोट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा घातक बल प्रयोग किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं के मौजूदा बंद होने से जमीनी स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो पा रहा है। एमनेस्टी ने जम्मू और कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति – जेएएसी पर लगाए गए प्रतिबंध पर भी चिंता जताई और कहा कि इस कदम से चुनाव को लेकर तनाव बढ़ गया है। एमनेस्टी ने कहा कि 5 जून से इस क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं। रावलकोट में हुई हिंसक घटना के बाद पीओजेके में अशांति मीरपुर तक फैल गई है, और कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने नए प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों पर गोलियां चलाईं।