प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ कल भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। यह बैठक सफल द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक और ठोस कदम साबित हुई। इस शिखर सम्मेलन में दोनों देशों की 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में मौजूद व्यापार-अनुकूल वातावरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली युवा, मजबूत व्यावसायिक प्रथाओं और निवेशक-अनुकूल नियामक ढांचा नॉर्वे की कंपनियों के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री आर्थिक साझेदारी समझौते-टीईपीए के लागू होने के साथ जहाज निर्माण, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और हरित प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत में नॉर्वे के अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के महत्वाकांक्षी हरित परिवर्तन पर जोर दिया। उन्होंने भारत के विकास, हरित ऊर्जा की मांग और हरित अवसंरचना के विस्तार पर बल दिया। उन्होंने शिखर सम्मेलन में एकत्रित व्यापार समुदाय को नॉर्वे की विशेषज्ञता और भारत के हरित और समुद्री अर्थव्यवस्था में मौजूद अवसरों का लाभ उठाते हुए साझेदारी बनाने के लिए आमंत्रित किया।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रेस वार्ता में इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में हासिल हुई महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित किया। भारत तथा नॉर्वे और कंपनियों के बीच कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें अंतरिक्ष, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्थिरता, टनलिंग प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे।
श्री जॉर्ज ने दोनों देशों के बीच हरित रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हरित और समुद्री अर्थव्यवस्था में साझेदारी से अधिक निवेश आएगा, रोजगार सृजित होगा और भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सहित सतत ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।