स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आराधना पटनायक ने कहा है कि रोगी सुरक्षा किसी एक कार्यक्रम या विभाग की जिम्मेदारी नहीं हो सकती है। इसको संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ के देखा जाना चाहिए। जिसमें विशेष रूप से गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम, निदान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन में इसको समाहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह बात कल नई दिल्ली में विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 के समारोह को संबोधित करते हुए कही। सुश्री पटनायक ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के छठे चरण के अनुसार, 96 प्रतिशत टीकाकरण और 90.6 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से किए जा रहे हैं। उन्होंने रोगी सुरक्षा को मजबूत करने, देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करने और देश भर में सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस के राष्ट्रीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) की देखभाल के सभी चरणों में रोगी सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण देखभाल को सुदृढ़ करना था। इस आयोजन में नीति निर्माता, स्वास्थ्य सेवा नेता, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक, गुणवत्ता प्रबंधक, विकास भागीदार और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि एक साथ आए। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा शपथ के साथ हुआ।
विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाए जाने के बाद, प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व रोगी सुरक्षा दिवस, सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा के लिए जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है। 2026 का विषय, “गैर-संक्रामक रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल” है।