सर्वोच्च न्यायालय ने आज कहा कि अस्पष्ट जमानत आदेशों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता नहीं है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता अदालत की गलतियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अभियोजन पक्ष के मामले पर निर्भर करती है।
फरवरी 2024 के बनभूलपुरा हिंसा मामले में आरोपी अब्दुल मलिक को नैनीताल उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की अपील को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की। जमानत रद्द करने की मांग करते हुए राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि उच्च न्यायालय ने बिना कारण बताए अस्पष्ट जमानत आदेश पारित किया।