अक्टूबर 2, 2026 10:08 अपराह्न

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राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्र सरकार को बाल देखभाल अवकाश संबंधी सिफारिशें सौंपी

राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्र सरकार को बाल देखभाल अवकाश संबंधी सिफारिशें सौंप दी हैं। इनमें बाल देखभाल अवकाश को निजी क्षेत्र में लिंग-भेद रहित बनाना, अनिवार्य सवैतनिक पितृत्व अवकाश और 2030 तक 5 लाख शिशु देखभाल केंद्रों की स्थापना करना शामिल है। आयोग ने यह सिफारिशें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा श्रम और रोजगार मंत्रालय को सौंपी हैं। आयोग ने अनौपचारिक, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी मातृत्व और बाल देखभाल लाभ प्रदान करने की सिफारिश की है। आयोग ने पाया कि 90 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिक प्रभावी कवरेज से बाहर हैं।

आयोग ने मौजूदा महिला-केंद्रित बाल देखभाल अवकाश ढांचे को लिंग-भेद रहित बाल देखभाल अवकाश में बदलने की सिफारिश की है, जो दोनों अभिभावकों में से किसी एक को उपलब्ध हों। रिपोर्ट में मौजूदा 730 दिनों के बाल देखभाल अवकाश ढांचे को दोनों कामकाजी अभिभावकों के बीच समान रूप से विभाजित करने का प्रस्ताव है। इसमें प्रत्येक को 365 दिन मिलेंगे, या साझा पूल बनाने का प्रस्ताव है जहां दोनों अभिभावक एक ही संगठन में काम करते हों। शून्‍य से दो वर्ष की आयु के बच्चों के लिए, रिपोर्ट में प्राथमिक और माध्यमिक देखभालकर्ताओं के बीच 60 अनुपात 40 के रूप में साझा देखभाल मॉडल का भी प्रस्ताव है।

इसमें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को सार्वभौमिक और कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार बनाने का भी प्रस्ताव है। रिपोर्ट में जैविक, दत्तक और प्रसवोत्तर माताओं के लिए मातृत्व लाभों में समानता की भी सिफारिश की गई है। इसमें दत्तक और प्रसवोत्तर माताओं के लिए अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना शामिल है।