केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि वैश्विक अशांति के माहौल में भी भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने आर्थिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन पर आधारित बिजली क्षमता 308 गीगावाट तक पहुंच गई है। इसमें से लगभग 100 गीगावाट क्षमता पिछले ढाई वर्षों से भी कम समय में जोड़ी गई है।
श्री जोशी ने कहा कि एग्रीवोल्टिक्स यानी कृषि-वोल्टीय प्रणाली किसानों के कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने का एक क्रांतिकारी अवसर है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण के अंतर्गत दुनिया का सबसे बड़ा एग्रीवोल्टिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। इस योजना से अब तक 25 लाख किसानों को लाभ हुआ है और 80 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सम्मेलन का विषय “पावरिंग द ग्लोबल साउथ” विकासशील देशों के लिए भारत की आकांक्षाओं और भविष्य के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इस अवसर पर, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टिक्स किसानों को एक ही भूमि पर फसलों को उगाने के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पन्न करने की अनुमति देकर वैश्विक कल्याण का एक ठोस मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से स्थानीय मिट्टी, जलवायु और खेती के तौर-तरीकों के आधार पर एग्रीवोल्टिक मॉडल विकसित करने का आग्रह किया।
सम्मेलन के दौरान, प्रल्हाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से ‘पीवी एटलस’ नामक एक ऑनलाइन टूल लॉन्च किया, जो किसानों को मिट्टी और फसल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक और भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक भी शामिल हुए।