सरकार ने देश का पहला सेवा उत्पादन सूचकांक-आईएसपी का पहला प्रायोगिक सूचकांक जारी किया। इससे पहली बार औपचारिक सेवा क्षेत्र की गतिविधियों का मासिक आकलन उपलब्ध होगा।
वर्ष 2024-25 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया यह पहला सूचकांक अप्रैल 2026 का है। इसमें सेवा क्षेत्र के 19 उप-क्षेत्र शामिल हैं, जो भारत के लगभग 60 प्रतिशत सेवा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय–एमओएसपीआई ने इसे देश के सेवा क्षेत्र के बेहतर आकलन और सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण श्रृंखला की समीक्षा और दायरा बढ़ाने के बाद सेवा उत्पादन का समग्र सूचकांक जारी किया जाएगा।
अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। 19 में से 14 उप-क्षेत्रों में पिछले वर्ष के अप्रैल की तुलना में दो अंकों की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि लगभग सभी अन्य क्षेत्रों में भी सकारात्मक वृद्धि रही।
एमओएसपीआई के अनुसार, सेवा उत्पादन सूचकांक में सबसे तेज़ वृद्धि आवास और भोजन सेवाओं में 37.2 प्रतिशत और खुदरा व्यापार में 30.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। मंत्रालय ने बताया कि यह आंकड़े ई-सांख्यिकी पोर्टल पर भी उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि सेवा उत्पादन सूचकांक की शुरुआत भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह सूचकांक पूरी तरह प्रशासनिक आंकड़ों, सरकारी मंत्रालयों से प्राप्त सूचनाओं और जीएसटी रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है। इसके लिए उद्योगों और कारोबारों पर कोई अतिरिक्त अनुपालन बोझ नहीं डाला गया है।
डॉ. गर्ग ने स्पष्ट किया कि यह सूचकांक उत्पादन का संकेतक है और इसे सकल मूल्य वर्धन- जीवीए, जिसका उपयोग जीडीपी के आकलन में किया जाता है, के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय हितधारकों से सुझाव लेकर इस सूचकांक को और बेहतर बनाएगा।
इस बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि इसे परीक्षण श्रृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम और पूर्ण सूचकांक के रूप में। उन्होंने कहा कि इसे सार्वजनिक करना मंत्रालय के इस विश्वास को दर्शाता है कि इसकी कार्यप्रणाली मजबूत है और सुझावों के आधार पर इसे और बेहतर बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं और आवास स्वामित्व जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे औपचारिक सेवा क्षेत्र के लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्से को इस सूचकांक के दायरे में लाया जा सकेगा।