वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज कहा कि राजकोषीय विवेक, अवसंरचना निवेश, बैंकिंग सुधार, बेहतर वितरण तंत्र और निरंतर सुधारों के संयोजन से पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक शक्ति और लचीलापन मजबूत हुआ है। नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने जीएसटी, दिवालियापन संहिता और चार श्रम संहिताओं के माध्यम से राष्ट्रीय ढांचों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले चार वर्षों के झटकों का सामना करते हुए अपनी बुनियादी व्यवस्था को बरकरार रखा है। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 7 दशमलव आठ प्रतिशत की वृद्धि का उदाहरण दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि आईएमएफ का अनुमान है कि वैश्विक रुझान में वृद्धि के बावजूद भारत का सामान्य सरकारी ऋण 2026 के जीडीपी के 83 दशमलव चार प्रतिशत से घटकर 2031 में 77 दशमलव सात प्रतिशत हो जाएगा।
अवसंरचना विकास पर, सुश्री सीतारामन ने कहा कि इस वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय 12.22 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लगभग 61 प्रतिशत का विस्तार हुआ है और 2014 से परिचालन में आने वाले हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत 52 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए गए हैं। पीएम आवास योजना, पीएम उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का उल्लेख करते हुए सुश्री सीतारामन ने कहा कि इन पहलों से नागरिकों की विकास में भागीदारी करने और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता मजबूत हुई है।