रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-डीआरडीओ ने ओडिशा तट के निकट डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली कुशा मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह पहला परीक्षण एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के विरुद्ध किया गया था जो उच्च गति और उच्च ऊंचाई वाले हवाई खतरे का अनुकरण कर रहा था और जिसे मिसाइल प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। मंत्रालय ने कहा कि कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानवरहित हवाई वाहनों और बड़े दुश्मन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को एक विस्तृत दूरी और ऊंचाई के दायरे में निष्क्रिय करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और सभी संबंधित पक्षों को बधाई दी। एक सोशल मीडिया पोस्ट में श्री सिंह ने कहा कि यह सफलता भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
श्री सिंह ने कहा कि लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की क्षमता दुनिया के केवल कुछ ही देशों के पास है। उन्होंने कहा कि कुशा मिसाइल प्रणाली भारत की आयात पर निर्भरता को कम करेगी और देश की वायु रक्षा क्षमता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत बनाएगी।