रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि तीनों सशस्त्र बलों के बीच तालमेल और एकीकरण पर जो ज़ोर दिया जा रहा है, वही भावना रक्षा लेखा विभाग के वित्तीय ढांचे में भी लागू की जानी चाहिए। आज नई दिल्ली में रक्षा लेखा दिवस पर उन्होंने कहा कि अगर वित्तीय प्रणालियों को भी एकीकृत किया जाए, तो पूरा रक्षा प्रबंधन और भी बेहतर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विभाग पूरे रक्षा मंत्रालय को जोड़ने वाली एक कड़ी के रूप में काम करता है और रक्षा प्रणाली की रीढ़ है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता ऑडिटिंग के सर्वोत्तम तरीकों को अपनाने और उन्हें आत्मसात करने तथा देश और दुनिया भर में बदलते मानकों के साथ तालमेल बिठाने का आग्रह किया।
श्री सिंह ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान खर्च की बुकिंग लगभग शत-प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और रक्षा लेखा विभाग तथा तीनों सेनाओं के मिले-जुले प्रयासों का प्रमाण है। मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने में उनकी अटूट प्रतिबद्धता, समर्पण, कड़ी मेहनत और दक्षता को दर्शाती है।
इस कार्यक्रम के दौरान, रक्षा मंत्री ने रक्षा लेखा विभाग की कई सूचना प्रौद्योगिकी पहलों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के भीतर वित्तीय प्रबंधन और डिजिटल प्रणालियों को मजबूत करना है। इनमें भारतीय सेना की वित्तीय सूचना प्रणाली को विभाग के सक्षम प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करना, रक्षा मंत्रालय के लिए नए सिरे से तैयार की गई राष्ट्रीय संकलन प्रणाली और पेमेंट रूटिंग एंड इंटीग्रेटेड सिस्टम मैनेजमेंट-पीआरआईएसएम प्लेटफॉर्म शामिल हैं।