नागर विमानन मंत्रालय ने भारतीय हवाई अड्डों पर काम करने वाले लोगों के लिए विमानन सुरक्षा प्रक्रियाओं को आसान और त्वरित बनाने के लिए कई सुधार शुरू किए हैं। नई दिल्ली में प्रचालन दक्षता और काम-काज में आसानी को बेहतर बनाने के लिए नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो के सुधारों पर पत्रकारों को जानकारी देते हुए, नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि इन बड़े बदलावों का मकसद कार्य प्रवाह को डिजिटल बनाना, प्रक्रियाओं को आसान बनाना और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए जवाबदेही-आधारित सुशासन की ओर बढ़ना है।
मंत्रालय ने बताया कि ब्यूरो ने सुरक्षा मंज़ूरी के तरीके को आसान बना दिया है। अब सुरक्षा मंज़ूरी किसी विशिष्ट वर्ग या प्रकिया पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि विमानन संस्थाओं की नौ पहचानी गई श्रेणियों पर लागू होगी। इन सुधारों के अंतर्गत, यह मंज़ूरी पांच वर्ष के लिए मान्य होगी। ब्यूरो ने हवाई अड्डे की सुरक्षा जांच के लिए अधिक व्यवस्थित और समय-सीमा वाली व्यवस्था शुरू की है। इसमें सभी आवश्यक मंजूरी एक ही चरण में प्राप्त करने और बताने तथा अलग-अलग चरणों के लिए तय समय-सीमा और लंबित मामलों की बारीकी से निगरानी करने पर ज़ोर दिया गया है।
हवाई अड्डा प्रवेश अनुमति परमिट व्यवस्था को बदलने के लिए, ब्यूरो ने पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक डिजिटल प्रणाली शुरू की है। इस प्रणाली में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन, दस्तावेज़ जमा करना, डिजिटल जांच और सत्यापन, डिजिटल अनुमोदन तथा फेशियल बायोमेट्रिक सत्यापन भी शामिल है। इस प्रणाली को सभी 169 हवाई अड्डों पर एक कॉमन प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर लागू किया जा रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि ये सुधार इसलिए भी आवश्यक हैं क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बन गया है और सक्रिय हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 में 74 से बढ़कर जुलाई 2026 में 165 हो गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ये सुधार ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक दृष्टिकोण और भविष्य में तेज़ी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के साथ तालमेल विमानन सुरक्षा नियामक ढांचा बनाने की कोशिश का हिस्सा हैं।