अक्टूबर 3, 2026 8:21 अपराह्न

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बाल सुरक्षा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है: अर्जुन राम मेघवाल

केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साइबरस्पेस में कानूनी सहायता और बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल देते हुए बाल सुरक्षा को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग बताया है। वे हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण – नाल्सा के दक्षिणांचल क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 में बोल रहे थे। सम्मेलन का विषय ऑनलाइन यौन शोषण की रोकथाम और बाल-हितैषी न्याय को मजबूत करना था। श्री मेघवाल ने युवाओं के सामने बढ़ते डिजिटल खतरों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें ऑनलाइन ग्रूमिंग, बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक और प्रौद्योगिकी-आधारित शोषण शामिल हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए, उन्होंने बाल संरक्षण के लिए “न्याय की सुगमता” के तीन मूलभूत आयाम प्रस्तुत किए: समझने में सुगमता, सहभागिता में सुगमता और कार्य करने में सुगमता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को उद्धृत करते हुए श्री मेघवाल ने कहा कि न्याय की भाषा वह होनी चाहिए जिसे न्याय प्राप्तकर्ता समझ सके। उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से एक ऐसा सहायक वातावरण बनाने का आग्रह किया जहां बच्चे बिना किसी भय या अपराधबोध के ऑनलाइन खतरों की रिपोर्ट करने में सक्षम महसूस करें।

श्री मेघवाल ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, नालसा की कानूनी सेवा इकाइयों, टेली-लॉ और न्याय बंधु जैसी पहलों के माध्यम से न्याय तक पहुंच को सरल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने 7 हजार दो सौ दस करोड़ रुपये के आवंटन से समर्थित ई-कोर्ट चरण-3 की भूमिका पर भी बल दिया, जो पीओसीएसओ और आईटी अधिनियम के तहत त्वरित और बाल-संवेदनशील मुकदमों के लिए ई-फाइलिंग और डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने में सहायक है। उन्होंने 2023 में 50 हजार से अधिक लाभार्थियों की सहायता के लिए तेलंगाना राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की सराहना करते हुए “न्याय रथम्” मोबाइल लोक अदालत वैन के शुभारंभ की प्रशंसा की। अपने संबोधन के समापन में, श्री मेघवाल ने सभी हितधारकों से अनुच्छेद 39ए के संवैधानिक वादे को निभाने का आग्रह किया, ताकि न्याय सुलभ, और सहानुभूतिपूर्ण हो तथा प्रत्येक बच्चे की गरिमा की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।