सितम्बर 11, 2026 2:06 अपराह्न

printer

ब्रिक्स व्यापार मंच का राष्ट्रीय राजधानी में शुभारंभ हुआ; विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के बीच अधिक लचीलेपन, स्थिरता और सहयोग का आह्वान किया

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि आज हर देश की आर्थिक रणनीति में आत्‍मनिर्भरता और संकट से उबरने की क्षमता महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही, मजबूत सहयोग और साझेदारी के जरिए सतत विकास को बढ़ावा भी जरूरी है। नई दिल्ली में आज सुबह ब्रिक्स व्‍यापार मंच को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने यह बात कही। उन्‍होने कहा कि ब्रिक्स में अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे के पूरक संसाधन, बाजार, क्षमता और अनुभव वाली अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। श्री जयशंकर ने कहा कि यह समूह सदस्य देशों को अपने अनुभवों और नीतियों की तुलना करने, ठोस व्यवस्थाओं को मजबूत करने और नए अवसर तलाशने का मंच प्रदान करता है।

डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यह वर्ष ब्रिक्स के लिए एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि समूह संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स ने अपनी सदस्यता, उद्देश्‍य और सहयोग की व्‍यवस्‍था के मामले में पिछले कुछ वर्षों में काफी विकास किया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्‍स की विषय-वस्‍तु “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” इस विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता आज की दुनिया की प्रमुख विशेषताएं बन गई हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष, महामारी और जलवायु संबंधी व्यवधानों के आर्थिक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति से हमेशा गहरा संबंध रहा है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, एआई, फिनटेक और उन्नत विनिर्माण बड़े अवसर उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन इनके साथ पहुंच, मानक, सुरक्षा और विश्‍वास के प्रश्‍न भी हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में नवाचार और उद्यमिता के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्ट-अप और इनक्यूबेटर्स को आपस में जोड़ना है। नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स स्टार्ट-अप इनोवेशन फंड भी बनाया गया है।

मंच के उद्घाटन सत्र में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से अपनी आर्थिक शक्ति को लोगों के लिए रोजगार, संपदा और समृद्धि में बदलने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्‍सा हैं। श्री गोयल ने कहा कि ब्रिक्स अब वैश्विक व्यापार के लगभग एक-चौथाई हिस्से के लिए जवाबदेह है, जिसमें भारत ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंजीनियरिंग का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में विनिर्माण निर्यात का सबसे बड़ा हिस्‍सा हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक फार्मेसी के रूप में भारत, ब्रिक्स के लिए फार्मास्यूटिकल्स और अन्य भारतीय उत्पादों का महत्वपूर्ण बाजार है। श्री गोयल ने बल दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार गहरा और मजबूत होना चाहिए तथा इसके लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता जरूरी है। उन्होंने कहा कि व्यापार सदस्य देशों के लोगों के विकास और कल्याण में बाधा नहीं बनना चाहिए। श्री गोयल ने ब्रिक्स देशों से एक-दूसरे के उत्पादों, कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अपने बाजार खोलने का भी आह्वान किया।

श्री गोयल ने कहा कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण पहल की है। भारत के यूपीआई ने एक वर्ष में 250 अरब से अधिक लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया है, जो विश्व भर में होने वाले लेनदेन का आधे से अधिक है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज यह विश्व के ग्यारह देशों में भी स्वीकार किया जाता है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्यों और सहयोगी देशों से भारत की भुगतान प्रणाली को जोड़ने, एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने, डिजिटल व्यापार को वैश्विक बनाने और भविष्य की उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था का करीब एक-चौथाई हिस्सा हैं और सतत भविष्य के लिए एक मजबूत आवाज हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य देश मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने, हरित और डिजिटल बदलाव को तेज करने तथा अपने बाजारों की विशाल क्षमता का उपयोग करने के लिए ठोस कदम उठाने को प्रतिबद्ध हैं।

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि ब्रिक्स व्‍यापार मंच को पारंपरिक व्यापार के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंच की सफलता का आकलन अर्थव्यवस्थाओं के आकार से नहीं, बल्कि ठोस परिणामों से होना चाहिए। इनमें तकनीक का इस्तेमाल, नवाचार का विस्तार, निवेश जुटाना और रोजगार सृजन शामिल हैं। श्री प्रसाद ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में दो प्रमुख प्राथमिकताएं हैं- सदस्य देशों के बीच व्यापार में संतुलन बनाना और व्यापार में सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाना।

उन्होंने कहा कि एआई में सहयोग से उत्पादकता बढ़ाने, जीवन स्तर में सुधार और आय में वृद्धि में मदद मिल सकती है। इससे आम लोगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों-एमएसएमई को भी लाभ होगा।