बम्बई उच्च न्यायालय की गोआ बेंच ने आज तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में अपनी कनिष्ठ सहकर्मी के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए दस साल की कडी सजा सुनाई। न्यायालय ने तेज पाल पर दस लाख 21 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया, जो पीडिता को दिया जाएगा। न्यायमूर्ति नीला गोखले और अमित जमसंदकर की खंडपीठ ने विश्वास या अधिकार के पद पर रहते हुए तेजपाल को दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न का दोषी पाया। न्यायालय ने न्यूनतम सजा सुनाते हुए कहा कि घटना को 13 साल बीत चुके हैं और तब से तेजपाल ने कोई अन्य अपराध नहीं किया है।
सुनवाई के दौरान, तेजपाल ने स्वयं को राजनीतिक पीड़ित और दो बेटियों का पिता बताते हुए नरमी बरतने की गुहार लगाई। गोआ सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय अधिकतम सुनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे एक कड़ा संदेश जाएगा। तरूण तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले को सर्वोच्च न्यायाल में चुनौती देंगे।
तरूण तेजपाल की पूर्व कनिष्ठ कर्मी ने नवंबर 2013 में गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 2021 में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद गोआ सरकार ने उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती दी थी।