असम विधानसभा ने आज समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर दिया। इसके साथ ही असम ऐसा कानून पारित करने वाला पूर्वोत्तर का पहला और देश का तीसरा राज्य बन गया है।
इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित मामलों में राज्य के सभी निवासियों के लिए एक समान नागरिक कानूनी ढांचा स्थापित करना है। संवैधानिक संरक्षण और पारंपरिक प्रथाओं को संरक्षित रखने के लिए विधेयक अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखता है। विधेयक में धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक समान ढांचे में रखने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य समानता और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है।
विधेयक पारित होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि अब यह विधेयक राज्यपाल को भेजा जाएगा। उसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही असम में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी।