बांग्लादेश में शारदीय दुर्गा पूजा के समापन के प्रतीक के रूप में आज विजया दशमी का त्योहार पूरी धार्मिक श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। उत्सव का समापन ‘सिंदूर खेला’ के साथ होता है जिसके बाद आज शाम नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों में देवी दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
ढाका में ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर, रमना काली मंदिर, रामकृष्ण मिशन और मठ तथा सिद्धेश्वरी काली मंदिर जैसे प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पारंपरिक लाल किनारे वाली सफेद साड़ियों में सजी विवाहित हिंदू महिलाएं ‘सिंदूर खेला’ में शामिल हो रही हैं। दशमी की अंतिम पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं देवी दुर्गा को सिंदूर और मिठाइयां अर्पित करती हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे के माथे और चेहरे पर सिंदूर लगाती हैं, मिठाइयां बांटती हैं और वैवाहिक सुख तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
दिन की शुरुआत दशमी पूजा के साथ हुई जिसके बाद ‘दर्पण विसर्जन’ किया गया जिसमें देवी के अगले वर्ष फिर से आने की कामना की गई।प्रतिमा विसर्जन के बाद परिवार के लोग और मित्र एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दे रहे हैं, बड़ों का आशीर्वाद ले रहे हैं और पारंपरिक मिठाइयां बांट रहे हैं। इस तरह, स्नेह और सद्भावना के साथ इस त्योहार का समापन हो रहा है।