भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन से पता चला है कि ड्रोन तकनीक की सहायता से तपेदिक (टीबी) के थूक के नमूनों से निदान में लगने वाला समय और मरीजों का खर्च कम हो सकता है।
यह अध्ययन आईसीएमआर द्वारा अपने प्रमुख ‘आई-ड्रोन’ पहल के हिस्से के रूप में तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले में एम्स बीबीनगर और राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिला टीबी कार्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस अध्ययन में टीबी निदान के लिए मरीज की यात्रा की पारंपरिक प्रणाली की तुलना ड्रोन-आधारित मॉडल से की गई। अध्ययन में 840 प्रतिभागियों को शामिल किया गया और पाया गया कि ड्रोन-आधारित नमूना परिवहन की शुरुआत के बाद टीबी निदान में लगने वाला औसत समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया। इससे निदान में होने वाली देरी भी कम हो गई, जिससे बीमारी की जल्द पुष्टि संभव हुई और तेजी से नैदानिक निर्णय लेने में मदद मिली। इसने दिखाया कि थूक के नमूने दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नैदानिक सेवाओं तक पहुंच में काफी सुधार कर सकते हैं, जिससे मरीजों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ में भारी कमी आएगी।