भारत में औपचारिक रोजगार की वृद्धि में युवा कामगार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2025-26 के दौरान जारी किए गए नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबरों (यूएनए) में से 79% 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के हैं। पल्स FY2026 नामक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष 57,000 से अधिक नए यूएएन जारी किए गए। इनमें से 35% से अधिक खाते 21 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के थे, जो औपचारिक रोजगार में प्रवेश करने वाला सबसे बड़ा समूह है।
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 2024-25 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईएमपी) के लगभग 59% नए ग्राहक 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के थे। ये आंकड़ा भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था में युवाओं के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत लगभग 64,000 अनुबंधों को सुगम बनाया गया। इनमें से 51% से अधिक अनुबंध ऑटोमोटिव क्षेत्र के थे। 2025-26 के दौरान सृजित नए रोजगार अनुबंधों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 28% थी और उन्हें 26% प्रशिक्षु अनुबंध प्राप्त हुए।
रिपोर्ट में छोटे शहरों के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है, जहां लगभग 69% कामगार द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में कार्यरत है। इसमें कहा गया है कि भारत का संगठित कार्यबल भी अधिक शिक्षित हो रहा है। लगभग 96% ने कम से कम कक्षा 10 उत्तीर्ण की है, जबकि 61% ने कक्षा 12 या उससे उच्चतर शिक्षा प्राप्त की है। लगभग 30% के पास स्नातक या स्नातकोत्तर योग्यताएं हैं।