उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में वन अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ विकास को आगे बढ़ाना होगा। उपराष्ट्रपति ने आज देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में वर्ष 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जंगलों की आग, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जैव विविधता में कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने जनजातीय और वन-निर्भर समुदायों को विकास की प्रक्रिया में साथ लेकर चलने तथा उनके पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने पर भी बल दिया।