अक्टूबर 26, 2026 8:39 पूर्वाह्न

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आतंकवाद को सरकारी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि आतंकवाद को सरकारी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सभी देशों द्वारा आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्‍त न करने की नीति न अपनाए जाने के कारण आतंकवाद जारी है।

डॉ. जयशंकर नई दिल्ली में चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया को आतंकवाद के साझा खतरे के प्रति अधिक सतर्क होना होगा और इसके सभी रूपों से निपटने के लिए एकजुट होकर ठोस प्रयास करने होंगे। विदेश मंत्री ने दुनिया में जारी संघर्षों के बीच शांति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कहीं भी होने वाला युद्ध, हर जगह शांति के लिए खतरा है। उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी दो बड़े संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे दूर रहने वाले समाज, अर्थव्यवस्थाएं और आम लोग भी इसकी कीमत चुका रहे हैं।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि जब भारत संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र समाधान बताता है, तो वह पूरी दुनिया की भावना व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयास कर रहा है और इस दिशा में अन्य साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि ग्‍लोबल साउथ आज वित्त, ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरक के संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्‍लोबल नॉर्थ को यह समझना चाहिए कि इन समस्याओं का समाधान निकालने में उसका भी समान हित है।

विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिमों से बचाने और देशों को आपूर्ति के कई विकल्प उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने वास्तविक संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आपूर्ति पर पाबंदियां और महत्वपूर्ण मार्गों में बाधाएं पैदा करने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ती हैं।

डॉ. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक संकटों का मूक दर्शक बने रहने के बजाय नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता दिनों दिन और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।