अमरीका के एक विश्लेषक ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को बहुत सफल बताया है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणा-पत्र अलग-अलग विचारों वाले देशों के बीच आम सहमति बनाने की भारत की क्षमता को दर्शाता है। अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि यह घोषणा-पत्र भारत की बढ़ती वैश्विक समन्वय क्षमता और ब्रिक्स की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित दो दिन के शिखर सम्मेलन का समापन कल हुआ। इसमें 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हुई, जो दुनिया की करीब आधी आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का प्रतिनिधित्व करती हैं। शनिवार को सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति षी चिनफिंग सहित कई देशों के नेता इसमें शामिल हुए।
घोषणा-पत्र में एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। ऐसे उपाय वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसमें आतंकवाद से निपटने, संघर्षों की रोकथाम और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उन्होंने कहा कि घोषणा-पत्र का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली आर्थिक तथा वित्तीय संस्थाओं के विकल्प के रूप में इस समूह को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की पहल से पता चलता है कि यह समूह उन अर्थव्यवस्थाओं के लिए ठोस कदम उठा सकता है, जो ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों से जुड़े शुल्क और प्रतिबंधों का सामना कर रही हैं।