पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन आकलन के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और नवीनतम तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। वे आज नई दिल्ली में ‘वन और वृक्ष संसाधनों के आकलन में नवीनतम तकनीकों के उपयोग’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
श्री यादव ने कहा कि मनुष्य प्रकृति से ऊपर नहीं है और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व के लिए उसका सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े आंकड़ों को बेहतर बनाने और प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से जलवायु संबंधी लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने में तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।
श्री यादव ने स्वदेशी तकनीकों और वन कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2035 तक तीन दशमलव पांच से चार अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर कार्बन सिंक बनाने के देश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी नवाचार के साथ मजबूत संस्थागत क्षमता भी जरूरी है।
श्री यादव ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमियां महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं। उन्होंने आर्द्रभूमि, वन क्षेत्र और घासभूमि के बीच उचित संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वनीकरण का उद्देश्य पौधारोपण के संरक्षण और हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार से स्पष्ट रूप से जुड़ा होना चाहिए।
इस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें वन सीमाओं के डिजिटलीकरण, वन और वृक्ष आवरण के आकलन तथा कार्बन भंडार के अनुमान पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।