भारत ने आगाह किया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार न होने और वैश्विक संघर्षों का प्रभावी समाधान न निकाल पाने से लोगों का संयुक्त राष्ट्र में विश्वास घट रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भविष्य के लिए बहुपक्षवाद को उपयुक्त बनाने संबंधी विषय पर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद चल रहे संघर्षों में सार्थक हस्तक्षेप करने में विफल रही है। इससे अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में उसकी क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
श्री हरीश ने कहा कि 80 वर्ष पुरानी संयुक्त राष्ट्र संरचना मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अब उपयुक्त नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए समझौते के अंतर्गत कार्य सूत्र सिर्फ कागजों में बन कर रह गए है। इस समझौते में हिंसा, नस्लवाद और विदेशियों से नफरत समाप्त करना, समानता को बढ़ावा देना और शांति स्थापना को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि सार्थक सुधारों की अत्यंत आवश्यकता है।
श्री हरीश ने कहा कि समझौते के कुछ कार्य बिंदुओं पर भारत की कुछ महत्वपूर्ण आपत्तियां हैं। लेकिन भारत ने समझौते का सकारात्मक रूप से समर्थन किया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र आम सभा को पुन: सशक्त करना और सतत विकास में प्रगति के लिए आर्थिक तथा सामाजिक परिषद की भूमिका को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
अल्प विकसित और विकासशील देशों पर श्री हरीश ने कहा कि भारत इन देशों में संसाधनों की आवाजाही के लिए प्रतिबद्ध है और ये सुनिश्चित करता है कि कोई भी देश पीछे न रहे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संसाधनों से अधिक प्रतिनिधित्व, जवाबदेह और विकासोन्मुख बनने का आह्वान किया।