भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई चेहरे की पहचान के लिए एक नया सॉफ्टवेयर किट लेकर आया है। इसका उद्देश्य सहयोगी संस्थानों के लिए आधार प्रमाणीकरण को आसान बनाना और विदेशों में रहने या यात्रा करने वाले भारतीयों के सामने आने वाले जियोफेंसिंग प्रतिबंधों को दूर करना है।
मुंबई में आयोजित ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में बोलते हुए यूआईडीएआई के अध्यक्ष नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि यह नया सॉफ्टवेयर किट सहयोगी बैंकों और व्यवसायों को यूआईडीएआई के केंद्रीय सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के सर्वर पर स्थानीय स्तर पर आधार सत्यापन करने की सुविधा देगा। श्री मिश्रा ने बताया कि आधार प्रमाणीकरण की संख्या कुछ साल पहले के लगभग 7 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रतिदिन से बढ़कर अब रोजाना करीब 10 करोड़ हो गई है।
उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई अब हर दिन 25 से 30 करोड़ प्रमाणीकरण संभालने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 600 से अधिक संस्थान आधार प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, जबकि आधार ऐप के डाउनलोड की संख्या भी 6 करोड़ के करीब पहुंच रही है।