सितम्बर 17, 2026 1:11 अपराह्न

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जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 1 अक्टूबर से होगा लागू

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम इस वर्ष पहली अक्टूबर से लागू होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल, मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि नवगठित कानून के प्रावधान, जो जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी के लिए सख्त नियम बनाते हैं। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, पिछले महीने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया। इस अधिनियम का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी को रोकना और लोगों को समय पर पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।

अधिनियम में प्रावधान है कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना रजिस्ट्रार को एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की स्वीकृति से ही किया जा सकता है। अधिनियम में कहा गया है कि यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना रजिस्ट्रार को दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा। इस अधिनियम में यह भी अनिवार्य है कि नामित प्राधिकारी विलंबित पंजीकरण की अनुमति देने से पहले सूचित जन्म या मृत्यु की प्रामाणिकता का सत्यापन करे। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है, और जारी किया गया प्रमाण पत्र व्यक्ति को कानूनी पहचान प्रदान करता है।