कर्मचारी भविष्य निधि संगठन – ईपीएफओ ने क्षतिपूर्ति और जुर्माने से संबंधित विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे को सुगम बनाने के लिए विश्वास 2026 योजना शुरू की है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा है कि यह योजना एक बार का विवाद समाधान है और नियोक्ताओं को पात्र मामलों को पारदर्शी, पूरी तरह से डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से निपटाने का अवसर प्रदान करती है। यह, अधिसूचना जारी होने की तिथि से छह महीने की अवधि तक लागू रहेगी। मंत्रालय ने कहा है कि इसे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने, मुकदमेबाजी को कम करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए जुर्माने तथा क्षतिपूर्ति से संबंधित लंबे समय से लंबित विवादों के शीघ्र समाधान को सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
विश्वास 2026 के तहत, 14 जून 2024 से पहले की अवधि से संबंधित चूक के लिए क्षतिपूर्ति और जुर्माने की गणना काफी कम दरों पर की जाएगी। संशोधित दरें दो महीने तक की चूक के लिए दशमलव 25 प्रतिशत प्रति माह, दो महीने से अधिक की चूक के लिए दशमलव 50 प्रतिशत और चार महीने से अधिक की चूक के लिए एक प्रतिशत प्रति माह होंगी। इसमें हर्जाने या जुर्माने के रूप में पहले से भुगतान की गई राशि के समायोजन, अपील दाखिल करने के लिए किए गए वैधानिक पूर्व-जमा के विनियमन और लंबित मामलों के निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से निपटान से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल हैं। विश्वास अधिनियम, 2026 के तहत आवेदन ईपीएफओ नियोक्ता पोर्टल के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र या ई-साइन का उपयोग करके ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। सुचारू कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए, ईपीएफओ ने अपने सभी क्षेत्रीय, प्रादेशिक और जिला कार्यालयों को विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। नियोक्ताओं की सहायता करने, आवेदनों को शीघ्रता से संसाधित करने और समय पर निपटान सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों में समर्पित विश्वास प्रकोष्ठ स्थापित किए जा रहे हैं।