विश्व में जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने के बीच, कई बलूच मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा घरों, सड़कों और समुदायों से जबरन गायब किए गए लोगों को याद किया। मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रभावी कदम उठाने की अपील की, जिससे हजारों जबरन गायब किए गए बलूच लोगों की रिहाई सुनिश्चित की जा सके। इनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
जबरन गुमशुदगी के पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय दिवस प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2011 में इस दिन की शुरुआत की थी, जिससे मानवाधिकारों के इस गंभीर उल्लंघन के बारे में दुनियाभर में जागरूकता बढ़ाई जा सके और पीड़ितों तथा उनके परिवारों को सम्मान दिया जा सके।
बलूचिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने कहा कि उसने जनवरी 2016 से जुलाई 2026 तक पूरे बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के 9 हजार 130 मामले दर्ज किए हैं। संगठन के अनुसार यह वास्तविक संख्या का केवल एक हिस्सा है, क्योंकि कई इलाके अब भी सुरक्षाबलों के कड़े नियंत्रण में हैं, जिससे बड़ी संख्या में मामलों का पता लगाना और उन्हें दर्ज करना मुश्किल है।
बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन-आजाद ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर बलूचिस्तान के लोगों के खिलाफ गैरकानूनी कार्रवाई करने का आरोप लगाया। बलूच यकजेहती कमेटी की नेता सबीहा बलूच ने कहा कि बलूच लोगों के लिए जबरन गुमशुदगी ऐसा मुद्दा नहीं है, जिसे वर्ष में केवल एक बार याद किया जाए, बल्कि यह उनकी रोजमर्रा की हकीकत है। बलूच वॉइस फॉर जस्टिस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों की रक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभाने और पाकिस्तानी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाने की अपील की।