बाजार नियामक सेबी ने आज मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस- एमआईआई के लिए नियमों में बदलाव के प्रस्ताव पेश किए हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य शेयर बाजार एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी जैसे संस्थानों के शासी बोर्डों में योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाना और प्रमुख प्रबंधन पदों के लिए योग्यता व अनुभव की शर्तों को अधिक स्पष्ट करना है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कहा है कि नए प्रस्तावों के तहत बड़े पैमाने पर शेयरधारिता वाली कंपनियों के निदेशक भी कुछ शर्तों के साथ एमआईआई के बोर्ड में शामिल होने के पात्र हो सकेंगे, भले ही उनके समूह की कोई अन्य कंपनी स्टॉक ब्रोकर या क्लियरिंग मेंबर के रूप में काम कर रही हो। सेबी ने ऐसी कंपनियों को परिभाषित करते हुए प्रस्ताव दिया है कि इनमें किसी भी निजी शेयरधारक की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरधारकों को इस सीमा से छूट दी जाएगी। नियामक का मानना है कि इन बदलावों के जरिए मौजूदा कड़े नियमों के कारण योग्य उम्मीदवारों को ढूंढने में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा और अनुभवी पेशेवर बड़ी संख्या में उपलब्ध होंगे।
इसके अलावा, सेबी ने प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, अनुपालन और जोखिम प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अधिकारियों की पात्रता और अनुभव के मानदंडों को और स्पष्ट करने का प्रस्ताव रखा है। इन पदों पर खाली होने वाली रिक्तियों को तीन महीने के भीतर भरने और काम की निरंतरता बनाए रखने के लिए उपाध्यक्ष नियुक्त करने पर भी राय मांगी गई है। इन सभी प्रस्तावों पर आम जनता और हितधारक 30 सितंबर 2026 तक अपने सुझाव दे सकते हैं।