रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत मांग के कारण बनी हुई है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अपेक्षा से बेहतर रहा।
रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। श्री मल्होत्रा ने कहा कि हाल में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि रही।
उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए आरबीआई ने वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।
आरबीआई ने घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए कहा कि मजबूत निर्यात, निवेश गतिविधियों में स्थिरता और आपूर्ति संबंधी बाधाओं में कमी से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताएं अब भी बनी हुई हैं।
आरबीआई ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है और हाल के महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में भी सुधार देखने को मिला है। गवर्नर ने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 693 अरब अमरीकी डॉलर है, जो दस महीने से अधिक के आयात के लिए पर्याप्त है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में प्लास्टिक के नोट चलन में आ जाएंगे। मुंबई में संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के नोट अधिक टिकाऊ होते हैं। उन्होंने बताया कि इनके सुरक्षा फीचर्स और अन्य विवरण जल्द साझा किए जाएंगे।
केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा और यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस पर बैंक के उप-गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि इनका उपयोग लगातार बढ़ रहा है और विभिन्न हितधारक इन्हें अपना रहे हैं।