पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में विलय किए गए आदिवासी जिलों में कर लागू करने के फैसले का तेज विरोध हो रहा है। नेता, व्यापारी और समाज के प्रतिनिधि मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान अगले 10 वर्षों तक कर छूट जारी रखे। खैबर और अन्य पूर्व संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों में आयोजित कई बैठकों, संवाददाता सम्मेलन और सार्वजनिक सभाओं में प्रतिभागियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने नए कर वापस नहीं लिया तो एक समन्वित विरोध अभियान शुरू किया जाएगा।
खैबर जिले में आयोजित सभा में बारा और जमरुद के व्यापारियों, आदिवासी बुजुर्गों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने सरकार की कर नीति का विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में विलय के बावजूद आदिवासी जिले अभी भी गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा, खराब शिक्षा सुविधाएं, बेरोजगारी और सीमित व्यावसायिक अवसर प्रमुख समस्याएं बनी हुई हैं। प्रतिभागियों ने कहा कि वर्षों के संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे, घरों और सार्वजनिक संस्थानों का पूरी तरह से पुनर्निर्माण नहीं हुआ है। सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व फाटा और पाटा क्षेत्रों के निवासी वर्षों से कुशासन, विस्थापन और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।