नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि सीमा के दोनों ओर 1545 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल नदी के किनारों और अलग-थलग बस्तियों में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं और बाढ़ के बहाव में बह गए शवों को निकाल रहे हैं। हालांकि, भोटे कोशी नदी के उद्गम स्थल के पास बनी एक नई बांध झील को लेकर चिंता बनी हुई है। अधिकारियों को आशंका है कि बांध टूटने से पानी का एक और तेज बहाव आ सकता है। इससे आपदा और भी गंभीर हो सकती है और बचाव कार्यों में बाधा आ सकती है। नेपाली सुरक्षाकर्मियों ने प्रभावित जिलों से 800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
इस बीच, आज दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके चलते नेपाल में बाढ़ की नई चेतावनी जारी की गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका के मद्देनजर अधिकारियों ने त्रिशुली क्षेत्र में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया है। नेपाल पुलिस ने बताया कि तिब्बत की ओर स्थित एक बांध फिर से टूट गया है। इस कारण वहां के निवासियों, सुरक्षाकर्मियों और बचाव कर्मियों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है। जलस्तर बढ़ने के कारण भारी मशीनरी हटाए जाने के चलते त्रिशुली और रसुवा के बीच सड़क निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है।
त्रिशुली और धोबी नदी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी बढ़ने से निवासियों को अपने घर, दुकानें और सामान छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। दुर्गम भूभाग और खराब मौसम के बावजूद बचाव अभियान जारी है।
भारत ने एक बड़ा बचाव और राहत अभियान शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में फंसे 290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं और उनकी खोज और बचाव कार्य में समन्वय स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। अब तक भारत ने 84 नागरिकों को बचाया है, जिनमें त्रिशुली-I जलविद्युत परियोजना के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि मंत्रालय नेपाल सरकार, अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों, पर्यटन संचालकों और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। खोज और बचाव कार्यों में सहायता के लिए एक 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और उन्हें भारत की पूर्ण मानवीय सहायता का आश्वासन दिया।