विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गरीटा ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत का दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, समुद्री और हवाई मार्गों की स्वतंत्रता, वैध व्यापार तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है।
कल पलाऊ के कोरोर में आयोजित 55वीं प्रशांत द्वीप समूह फोरम नेताओं के सत्र को संबोधित करते हुए श्री मार्गरीटा ने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र को दूरस्थ क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि साझा हिंद-प्रशांत का अभिन्न हिस्सा मानता है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के माध्यम से भारत के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत के प्रयासों को और मजबूत कर रहा है।
इस बैठक से इतर श्री मार्गरीटा ने टोंगा के प्रधानमंत्री लॉर्ड फकाफानुआ से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और टोंगा के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।
सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मार्गरीटा ने कहा कि भारत टोंगा के साथ अपनी मित्रता और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बहुत महत्व देता है।