जम्मू-कश्मीर सरकार ने लैंड पूलिंग नीति-2026 को अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य भूस्वामियों और विकास एजेंसियों की स्वैच्छिक भागीदारी से भूमि को एकत्र कर सुनियोजित शहरी विकास के लिए ढांचा तैयार करना है।
नीति के अनुसार, लैंड पूलिंग जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम-1970 के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में लागू होगी। इसके लिए विकास प्राधिकरण या सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य संस्था जिम्मेदार होगी।
नीति में ऐसी अनधिकृत कॉलोनियों की भूमि को शामिल नहीं किया गया है, जिनका अभी नियमितीकरण नहीं हुआ है।
इसके अलावा, मामले का निपटारा होने तक विवादित भूमि, वन क्षेत्र, चरागाह, प्राकृतिक नाले, जलाशय, विरासत स्थल, बाढ़ और सिंचाई विभाग की भूमि तथा सरकार द्वारा विशेष रूप से बाहर रखी गई अन्य भूमि भी लैंड पूलिंग के दायरे में नहीं आएगी।
नीति के तहत किसी लगातार जुड़े क्षेत्र में कम से कम 70 प्रतिशत भूमि लैंड पूलिंग के लिए दिए जाने के बाद ही वह क्षेत्र इस योजना के लिए पात्र होगा।
लैंड पूलिंग योजना के तहत बनाई गई बुनियादी सुविधाओं के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी विकास एजेंसी की होगी।
वहीं, साझा बुनियादी ढांचे के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कंसोर्टियम की होगी। यह जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण या शहरी स्थानीय निकाय के संबंधित नियमों और निर्देशों के अधीन होगी।