भारत के थोक मूल्य सूचकांक- डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति जून महीने के 9.87 प्रतिशत के मुकाबले जुलाई महीने में मामूली रूप से घटकर 9.78 प्रतिशत हो गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में वार्षिक मुद्रास्फीति मुख्य रूप से खनिज तेलों, खाद्य पदार्थों, बुनियादी धातुओं, गैर-खाद्य पदार्थों, खाद्य उत्पादों और रसायनों तथा रासायनिक उत्पादों की उच्च कीमतों के कारण बढ़ी।
महीने-दर-महीने आधार पर शीर्ष मुद्रास्फीति में यह कमी मुख्य रूप से ईंधन और बिजली समूह में मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण हुई। इस कमी के बावजूद थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति-डब्ल्यूपीआई लगातार तीसरे महीने 9 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। उत्पादन मूल्य सूचकांक- पीपीआई में साल-दर-साल 9.57 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि महीने-दर-महीने आधार पर इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। वहीं, खाद्य पदार्थों और खाद्य उत्पादों को शामिल करने वाला डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक जून महीने में 6.14 प्रतिशत के मुकाबले जुलाई में बढ़कर 6.65 प्रतिशत हो गया।
डब्ल्यूपीआई की प्रमुख श्रेणियों में, प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति जून महीने के 7 प्रतिशत मुकाबले जुलाई में बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति भी 7.5 प्रतिशत से बढ़कर 8.3 प्रतिशत हो गई। हालांकि, ईंधन और बिजली समूह की मुद्रास्फीति जुलाई में घटकर 20 प्रतिशत हो गई, जो जून महीने में 27.4 प्रतिशत थी।